हिमाचल में यहां रहती थी गुलाम वंश की शासक रजिया सुल्तान, मिलते रहते हैं सोना, चांदी और अशरफी

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हिमाचल में यहां रहती थी गुलाम वंश की शासक रजिया सुल्तान, मिलते रहते हैं सोना, चांदी और अशरफी


सोलन:
दिल्ली सल्तनत की गद्दी पर बैठने वाली पहली महिला शासक रजिया सुल्तान के अपने जीवन काल में बतौर प्रवास सोलन जिले के कुनिहार में रहने की वजह से यहां आज भी खुदाई में सोना चांदी और पुरातात्विक महत्व की चीजें मिलती रहती हैं।

ढाई साल तक रही थी रजिया सुल्तान:

इल्तुतमिश की बेटी और गुलाम वंश की शासक रजिया सुल्तान कुनिहार क्षेत्र के ऊंचा गांव में अपने दल बल के साथ ढाई वर्ष तक रही थी। ऊंची जगह होने के कारण उन्होंने कुनिहार रियासत की के गांव को अपने रहने के लिए चुना था। 

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इतिहासकारों का मानना है कि रजिया सुल्तान के लाव लश्कर के लिए प्राचीन शिव मंदिर तालाब के पास एक पोखर थी।

तालाब में रजिया ने बोया था नीलकमल का बीज:

जिसकी खुदाई तत्कालीन कुनिहार रियासत के राजा अच्छर देव सिंह की इजाजत से की गई और इस पोखर को एक बड़े तालाब में तबदील किया गया था। उस समय इस तालाब में नील कमल का बीज रजिया सुल्तान ने डाला था। इसके प्रमाण आज भी तालाब में खिले कमलों से मिलता है।

कभी सवें मुल्ख के नाम से मशहूर था कुनिहार:

हिमाचल प्रदेश के अस्तित्व में आने से पूर्व कुनिहार एक छोटी सी रियासत थी। सवें मुल्ख के नाम से मशहूर कुनिहार को प्राकृतिक सौंदर्य के कारण छोटी विलायत के नाम से भी जाना जाता है।

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आठवीं शताब्दी के आस पास अखनूर जम्मू से आये सूर्यवंशी राजपूत अभोज देव द्वारा कुनिहार रियासत की नींव रखी गई थी, जो उस समय कुनुर रियासत के नाम से भी जाती थी।

मिलते रहते हैं राजसी ठाठ बाठ के प्रतीक:

जनश्रुति के अनुसार कुनिहार क्षेत्र के चारों ओर कुनी खड्ड बहती है और कुनी खड्ड कुनिहार रियासत को हार पहनाती नजर आती है, जिसके कारण आज यह क्षेत्र कुनिहार के नाम से प्रख्यात है।

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रजिया सुल्तान यहां रही थी और लंबे समय तक रही इस कारण राजसी ठाठ बाठ के प्रतीक सोने, चांदी, अशरफी, सेना के हथियार और पुरातात्विक महत्व की चीजें खुदाई के दौरान मिलते रहते हैं।

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