शिमला: राजनीति को बयानों का खेल कहा जाता है। एक गलत बयान से गए मैसेज ने बड़े-बड़े भूपतियों के सत्ता की कुर्सी पलट दी है। हिमाचल में भी ऐसा ही कुछ माहौल बनता दिख रहा है।
कर्मचारी ही सत्ता बनाते बिगाड़ते हैं:
हिमाचल के बारे में कहा जाता है कि यहां सरकारी कर्मचारी ही सरकार बनाते हैं गिराते हैं। ऐसे में उपचुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी ने कर्मचारियों से दुश्मनी मोल ले ली है।
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नाम नहीं छापने के शर्त पर कर्मचारी संघ के एक बड़े नेता ने बताया कि विक्रमादित्य सिंह ने अपने इस बयान से कर्मचारी वर्ग के स्वाभिमान को चुनौती दे दी है। ऐसे में कांग्रेस को कर्मचारियों को अपने साथ करना चुनौतीपूर्ण होगा।
हिमाचल कांग्रेस के पप्पू!
बता दें कि विक्रमादित्य ने शिमला के सुन्नी क्षेत्र में कहा कि उनकी गिद्ध की नजर है। सब कुछ नजर आ रहा है, उनकी सरकार बनते ही कर्मचारी-अधिकारियों को पटक-पटक कर फेंक देंगे।
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इस बयान के बाद से ही उनकी तुलना राहुल गांधी से होने लगी है। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें हिमाचल कांग्रेस का पप्पू बता रहे हैं। लोगों का कहना है कि विक्रमादित्य ने खुद से अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली है।
अधिकारी-कर्मचारी क्या करें:
विक्रमादित्य के इस विवादित बयान से एक बात जो साफ हो रही थी कि वह नहीं चाहते हैं कि अधिकारी और कर्मचारी वर्ग सरकार का काम काज में सहयोग करें। जिसे वह अपनी भाषा में चाटुकारिता बता रहे थे।
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विचारणीय है कि अधिकारी और कर्मचारी वर्ग सरकार के हाथ-पैर होते हैं। यदि यही वर्ग सरकार का सहयोग छोड़ विपक्ष की तरह धरने पर बैठ जाए तो प्रदेश में अराजकता फैल जाएगी।
सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों का यही कार्य भी है कि वह शाशकीय कार्य में सरकार का भरपूर सहयोग अपने दायित्व के अनुसार करे। ताकि जनहित की योजनाएं लोगों तक पहुंचे और उनकी सुनवाई हो।




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