शिमला: उपचुनाव के परिणामों का ऐलान होते ही हिमाचल प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। कांग्रेस आत्मविश्वास से लबरेज है, वहीं भाजपा के लिए अग्निपरीक्षा है।
भाजपा ने उपचुनाव में जिस तरह का प्रदर्शन किया है उससे साफ है कि सरकार के कई मंत्रियों का पत्ता साफ हो सकता है, खतरे की तलवार मुख्यमंत्री पद पर भी लटक सकती है।
बीजेपी के मंत्री भी नहीं दिला सके लीड
मंत्रियों की बात करें तो शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर अपने विधानसभा क्षेत्र में भाजपा को लीड दिलाने में असफल रहे। रामलाल मारकंडा भी लाहुल-स्पीति से लीड नहीं दिला सके।
साथ ही सरकार में नंबर दो का कद रखने वाले जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर भी मंडी क्षेत्र में कुछ खास नहीं कर सके। कोई बड़ी लीड इनके क्षेत्र से भी नहीं आया है। जोगिंदर नगर और सिराज क्षेत्र से भाजपा को बड़ी लीड मिली है।
ऐसे में खतरा यह भी है कि जिन विधानसभा हलकों में भाजपा विधायक पांच हजार के करीब के अंतर से पिछड़े हैं। ऐसे सीटिंग विधायक का टिकट आगामी चुनाव में कट सकता है। खासकर, मंत्रीमंडल विस्तार में लीड नहीं दिला पाने वाले मंत्रियों का पद छिनना तय माना जा रहा है।



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