देवता से ली अनुमति:
बता दें कि करीब दो किलोमीटर खड़ी चढ़ाई चढ़कर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ऐतिहासिक मलाणा गांव पहुंचे। सड़क मार्ग से गांव पहुंचने के लिए उन्होंने पौने दो घंटे में पैदल सफर तय किया। गांव के प्रवेश द्वार पर पहुंचते ही उन्होंने देव जमदग्नि ऋषि के दरबार में माथा टेका और प्रवेश की अनुमति ली।
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देवता ने गूर के माध्यम से मुख्यमंत्री व उनके साथ मौजूद लोगों को गांव में आने की अनुमति दी। जिसके बाद मुख्यमंत्री ने गांव में प्रवेश किया। पिछले दिनों हुए अग्निकांड के पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर उन्हें मदद का आश्वासन दिया।
सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि अग्निकांड प्रभावितों को सरकार की तरफ से पहले ही बर्तन,कंबल,राशन व तिरपाल आदि उपलब्ध करवा दिए थे। सभी प्रभावितों के मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनेंगे। सरकार ने इसकी स्वीकृति प्रदान कर दी है।
भांग की खेती को कानूनी अनुमति:
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने यहां पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि मलाणा गांव का इतिहास भांग की खेती का रहा है। सरकार प्रदेश में नियंत्रित तरीके से भांग की खेती करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके लिए कमिटी का भी गठन किया गया है।
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यह कमेटी उत्तराखंड माडल व विदेशों में होने वाली भांग की खेती व नियमों का अध्ययन कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद सरकार निर्णय लेगी। साथ ही उन्होंने कहा कि भांग की खेती को वैध करने की पुरानी मांग है। सरकार इसको लेकर काफी गंभीर है।
नहीं पहुंच पाए थे धूमल:
बता दें कि वर्ष 2008 में भी मलाणा गांव में भीषण अग्निकांड हुआ था। तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रो। प्रेमकुमार धूमल ने गांव में जाने का प्रयास किया था, लेकिन बीच रास्ते से उन्हें वापस होना पड़ा था।
आज मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मलाणा गांव पहुंच कर इतिहास रच दिया है। रास्ते की खड़ी चढ़ाई चढ़ने के बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पत्थरों पर बैठकर आराम किया और यहां प्राकृतिक जलस्रोत का पानी पीया।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर कुल्लू जिला के मलाणा जाते समय चंबा के एक कैफे संचालक से उसके कारोबार की जानकारी लेते हुए। pic.twitter.com/drgpi33JBc
— Hans Raj (@Hansraj047) November 12, 2021
रास्ते में कैफे संचालकों व चाय की दुकान करने वालों से बातचीत की। उन्होंने चंबा जिला के सलूणी के अजीत कुमार से उनके कारोबार के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री के साथ शिक्षा मंत्री गोविन्द ठाकुर, पूर्व सांसद महेश्वर सिंह, बंजार के विधायक सुरेंद्र शौरी भी थे।



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