कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश की जयराम सरकार ने एक कारोबारी से 40 हजार रुपए की घूस लेने वाले रिश्वतखोर सीनियर सिविल जज नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। बता दें कि सुंदरनगर के तत्कालीन सीनियर सिविल जज गौरव शर्मा पिछले काफी दिनों से निलंबित चल रहे थे। इस बीच हिमाचल हाई कोर्ट की जांच कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद राज्य के गृह विभाग ने यह कदम उठाया है।
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बता दें कि आरोपी जज गौरव शर्मा पंजाब के अमृतसर के रहने वाले थे। यहां सुंदरनगर में उनके कार्यकाल के दौरान अदालत में एक कारोबारी ने चेक बाउंस के कई मामले दायर कर रखे थे। इसी मामले में गौरव शर्मा ने कारोबारी को अपने चैंबर में बुलाकर चेक का पैसा दिलाने की एवज में 40 हजार रुपए रिश्वत के तौर पर मांगे थे और पैसे लेकर अपने आवास पर आने को कहा था।
विजिलेंस ने दबिश देकर रंगे हाथों पकड़ा था
इसके बाद अश्वनी नामक पीड़ित कारोबारी रिश्वत के पैसे लेकर उनके आवास पर पहुंचा और पैसे जज को सौंप दिए। इसी बीच विजिलेंस की टीम ने गौरव शर्मा के घर पर दबिश देकर उन्हें रंगेहाथ रिश्वत लेते हुए पकड़ लिया था। वहीं, विजिलेंस द्वारा पकड़े जाने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था।
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इसके बाद जमानत पर रिहा होने के बाद प्रदेश उच्च न्यायालय ने उनकी न्यायिक शक्तियां छीन कर मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित कर दी थी। वहीं, अब गृह विभाग के प्रधान सचिव रजनीश कुमार ने केंद्रीय सिविल सर्विस नियम 1965 के तहत प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए रिश्वतखोर सीनियर सिविल जज गौरव शर्मा को उनकी नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। इसकी पुष्टि गृह विभाग के विशेष सचिव राकेश शर्मा ने की है।



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