शिमला डेस्क: हिमाचल प्रदेश में भाजपा को बुरी तरह से उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस सभी सीटों पर चुनाव जीत कर क्लीन स्वीप कर गई है।
प्रदेश अध्यक्ष कश्यप भी रहे फेल:
वहीं, भाजपा के लिए अब शेष बचा 10 महीनों का कार्यकाल अग्निपरीक्षा साबित होने जा रहा है। हार के कारणों के समीक्षा की बात तो हर पार्टी करती ही है। भाजपा का भी यही कहना है।
हालांकि, जिस तरह से चुनाव परिणाम सामने आए हैं। उससे साफ है कि टिकट वितरण प्रणाली भाजपा की गलत थी। आंतरिक गुटबाजी हावी रही। जिसकी पूरी की पूरी जवाबदेही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप की बनती है।
मोदी को कॉपी करते रहे जयराम:
भाजपा का प्रदेश संगठन किसी भी विधानसभा सीट पर आंतरिक गुटबाजी को खत्म नहीं कर पाया। पार्टी का स्थानीय कैडर उम्मीदवार के पक्ष में चुनाव करने नहीं गया। पूरा चुनाव मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने अपने नाम पर लड़ा।
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पूरे उपचुनाव पर गौर करें तो जयराम ठाकुर यहां मोदी स्टाइल में चुनाव लड़ते आए। उनका शासन भी कुछ इसी तरह का है। अधिकांश अहम मंत्रालय उनके पास हैं। सभी मुख्य पदों पर उनके राजनीतिक करीबी लोग हैं।
फटे पोस्टर निकले जयराम:
चुनाव से पहले और चुनाव के समय भी प्रशासनिक अधिकारियों का बड़े स्तर पर फेरबदल किया गया। साथ ही पूरे चुनाव में भाजपा के पोस्टर बॉय जयराम ठाकुर रहे। ठीक उसी तरह जिस तरीके से प्रधानमंत्री मोदी देश में लोकसभा का चुनाव लड़ते हैं।
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप के बारे में भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा रहती है कि वो भी मुख्यमंत्री के स्टाम्प पर्सन हैं। चुनाव के समय भी संगठनात्मक स्तर पर लिए गए निर्माण उनके अपरिपक्वता का परिचायक रहा।
सुरेश कश्यप प्रदेश की राजनीति में कोई बड़ा चेहरा नहीं हैं। सांसद बनने से पहले भी प्रदेश की राजनीति में उनका कोई उल्लेखनीय योगदान नहीं रहा है। चुनाव में उन्होंने काफी दौरे किए लेकिन पार्टी को एकजुट रखने की जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे।



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