शिमला। हिमाचल प्रदेश के सीएम जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में बीते कल हुई कैबिनेट मीटिंग हो या उससे दो दिन पहले आयोजित की गई JCC बैठक। इन दोनों ही बैठकों में अगर किसी की उम्मीद को सबसे बड़ा झटका लगा है, तो वे हैं दिन रात एक कर हर परिस्थिति में जनता और सरकार का साथ निभाने वाले पुलिसकर्मियों को। जेसीसी बैठक के बाद से आरक्षी के पद पर तैनात पुलिसकर्मियों की अनदेखी का मामला सूबे भर में गरमाया हुआ है।
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प्रदेश भर के मीडिया चैनल्स द्वारा जोर शोर से यह मुद्दा उठाया जा रहा है, यहां तक की इन पुलिसकर्मियों की मांगों को जनता का भी समर्थन मिल रहा है। इसके बावजूद भी सूबे की जन्यार सरकार इनके पक्ष में कोई ठोस फैसला नहीं ले रही है। एक तरफ जहां अपनी अनदेखी के चलते इन पुलिस कर्मियों ने मेस का खाना भी छोड़ रखा है। वहीं, सीएम जयराम ठाकुर से मुलाक़ात करने के बाद भी इसके हित बात आगे नहीं बढ़ी है।
इस वजह से छलक रहा पुलिसवालों का दर्द
अब स्थिति ऐसी है कि ये जनता के असल सेवक ना तो कोई आन्दोलन कर सकते हैं और ना ही किसी अन्य के पास जाकर अपनी फ़रियाद सुना सकते हैं, ऐसे में इन्होंने अन्न त्याग आन्दोलन छेड़ रखा है।
गौरतलब है कि 2013 में भर्ती होने वाले कर्मियों को 5910 प्लस 1900 का वेतनमान दिया गया था। दो साल बाद 10,300 प्लस 3200 कर दिया गया। लेकिन 2015 के बाद से भर्ती होने वाले आरक्षियों को पुराना पे बैंड ही दिया जा रहा है।
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वहीं, 10,300 प्लस 3200 के लिए 8 वर्ष का प्रोबेशन पीरियड रखा गया है। ऐसे में अंदरखाते से पुलिस कर्मियों का दर्द छलक कर सामने आ रहा है। इस पोरे मसले में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब अन्य विभागों के कर्मचारियों को दो साल बाद वेतनमान मिल जाता है तो उन्हें क्यों नहीं।
इन पुलिस कर्मियों के परिवार पहुंचाएंगे सरकार को चोट!
इस सब के बीच माना यह भी जा रहा है कि इन पुलिसकर्मियों की अनदेखी सरकार को भारी पड़ सकती है। क्योंकि भले ही पुलिस के ये जवान नियम कायदों के कारण खुले तौर पर आन्दोलन ना करें लेकिन आगामी चुनावों में इनके परिवार मौजूदा सरकार को अच्छी खासी चोट पहुंचा सकते हैं।
इस वजह से सरकार के बीच भी इस मसले को लेकर खलबली मची हुई है, लेकिन इसके बावजूद भी सरकार ने इस मसले पर एक तरह से मौनपूर्ण रवैया अपना रखा है।
राजनीतिक रूप धर रहा मामला
वहीं, अब यह मसला धीरे-धीरे राजनीतिक रूप लेता हुआ भी नजर आ रहा है। पहले तो कम्युनिस्ट राकेश सिंघा ने पुलिस कर्मियों की मांग को सही ठहराया था।
वहीं, अब हिमाचल कांग्रेस का सबसे एक्टिव चेहरा माने जा रहे विधायक विक्रमादित्य सिंह ने भी इन पुलिसकर्मियों की मांग को अपना समर्थन दे दिया है। ऐसे में अब देखना यह होगा कि प्रदेश सरकार द्वारा कब और किस तरह इस मसले का हल निकाला जाएगा।



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