शिमलाः हिमाचल प्रदेश सरकार के चार साल पूरे होने के उपलक्ष में आयोजित कार्यक्रम में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिमाचल शिरकत करने पहुंचे हुए थे। इस दौरान उन्हें यहां लगे एक स्टॉल से भांग के रेशे से बनी चप्पल (जिसे पहाड़ी भाषा में 'पूहल' कहा जाता है) ने प्रधानमंत्री मोदी को अपनी ओर खासा आकर्षित किया था।
पूहल के 100 जोड़े प्रधानमंत्री के कार्यालय भिजवाए गए
इस दौरान उन्होंने काशी के मंदिरों में सेवा कर रहे पुराजियों, सेवादारों सहित सुरक्षा कर्मियों के लिए ये पूहल भेजने का आग्रह किया था। इसी को मद्देनजर रखते अब हुए कुल्लू प्रशासन की ओर से पूहल के 100 जोड़े प्रधानमंत्री के कार्यालय भिजवाए गए हैं।
बता दें कि हाल ही में जब पीएम मोदी अपने वाराणसी दौरे पर गए हुए थे तो उन्होंने पाया कि मंदिर में सेवा दे रहे पुजारियों सहित अन्य लोगों को खडाऊं पहने के कारण काफी दिक्कतें पेश आती हैं। इस वजह से उन्होंने पूहल के 100 जोड़े काशी भिजवाने का आग्रह किया था।
बनाने में लग जाते हैं 4-5 घंटे
मंडी कुल्लू में पूहलों को भांग के रेशे सहित अन्य जड़ी बूटियों से तैयार किया जाता है। इन्हें बनाने में करीब 4 से 5 घंटे तक लग जाते हैं। ये पूहल पवित्र होने के साथ साथ काफी आराम दायक भी हैं। खास बात तो ये है कि इन्हें पहनकर देवस्थल यानी मंदिरों के भीतर जाने में भी कोई पाबंदी नहीं होती है।
ऐसे में पूहल को खडाऊं की जगह इस्तेमाल किया जा सकता है। हिमाचल में मंदिरों के पुजारियों समेत आम लोग भी इनका इस्तेमाल करते हैं। सर्दियों के समय तो महिलाएं, बूढे व बच्चे भी पूहल पहनते हैं।



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