बलिदानी अंकेश की पार्थिव देह आज घर पहुंचने की उम्‍मीद: पिता को यकीन नहीं, मां फोटो लिए बैठी

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बलिदानी अंकेश की पार्थिव देह आज घर पहुंचने की उम्‍मीद: पिता को यकीन नहीं, मां फोटो लिए बैठी


बिलासपुर।
अरुणाचल में आए बर्फीले तूफ़ान का कहर हिमाचल समेत पूरे देश पर टूटा है। इस तूफ़ान में हिमाचल के दो फौजी बेटों समेत देश के कुल 7 जवान शहीद हुए हैं। इस बीच माना जा रहा है कि घुमारवीं के गांव सेऊ के 22 साल के अंकेश भारद्वाज और कांगड़ा के बैजनाथ के महेशगढ़ के 26 वर्षीय जवान राकेश सिंह की पार्थिव देह आज या कल तक उनके पैतृक गांवों में पहुंच जाएगी। 

माता-पिता के मुंह से एक शब्द नहीं निकल पा रहा

वीर सपूत अंकेश भारद्वाज की पार्थिव आज घर पहुंचने की उम्‍मीद है। पिता बांचाराम और माता कश्मीरा का जिगर मानों पत्थर सा हो गया है। ढाढस बंधाने वालों की भीड़ घर में लगी है, लेकिन माता-पिता के मुंह से एक शब्द नहीं निकल पा रहा है। मां मुश्किल से सूखी हुई पलकें झपका रही हैं, मगर पिता पूर्व सैनिक होने के नाते सबके सामने नहीं, बल्कि अकेले में जाकर अपने आंसू पोंछ रहे हैं। 

पिता को नहीं था यकीन- कि नहीं रहा बेटा 

वहीं, कल तक बलिदानी अंकेश भारद्वाज के पिता यह मानने को तैयार नहीं थे कि उनका बेटा देश के लिए कुर्बान हो गया है। वह अपने परिवार व रिश्तेदारों का हौसला बने और इस विश्वास में बैठे रहे कि उनका बेटा अभी सकुशल लौट आएगा। नम आंखों से उन्होंने यह भी कहा कि मैं एक फौजी हूं हौसला है, लेकिन एक पिता भी हूं आखिर कब तक हिम्मत रखूं। उन्होंने कहा कि अब उन्हें भी किसी अनहोनी का एहसास हो रहा है, लेकिन इस बात पर विश्वास नहीं हो पा रहा है। 

अंकेश की दादी को अबतक पता नहीं 

अंकेश के पिता बांचा राम परिवार के अन्य सदस्यों के सामने चुप हैं। उन्होंने अभी तक इस बात की भनक अंकेश की दादी को नहीं लगने दी है। बांचा राम अपने छोटे बेटे को भी सेना में भर्ती होने के लिए तैयार कर रहे थे, ताकि वह भी सेना में भर्ती होकर देश सेवा करे। 

अंकेश की मां बेटे की फोटो हाथ में लिए बैठी 

इधर, अंकेश की 92 वर्षीय दादी को सुनाई नहीं देता है और घर में इतने सारे लोगों की मौजूदगी से वह पूछे जा रही है कि आखिर हुआ क्या है। अंकेश की मां बेटे की फोटो हाथ में लिए देखती जा रही है। रिश्तेदार व गांव की महिलाएं हौसला बढ़ा रही हैं, लेकिन मां किसी की बात का जवाब तक नहीं दे पा रही है।

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