शिमलाः हिमाचल प्रदेश एक पहाड़ी राज्य है, जिसकी आबादी 70 लाख के करीब है। वहीं, आपको ये जान के हैरानी भी नहीं होगी कि राज्य में 15 लाख लोग ऐसे हैं जो शराब का सेवन करते हैं। अगर इसमें कुछ हैरान करने वाला है तो वह है शराब की खपत। आंकड़ों के हिसाब से शराब पीने वाला हर हिमाचली शख्स औसतन हर साल 60 बोतल से ज्यादा शराब पी जाता है।
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गौरतलब है कि प्रदेश के राजस्व का अधिक हिस्सा शराब से आता है। इस वजह से सरकार आर्थिक संसाधनों के लिए राजस्व पर निर्भर है। ऐसे में यदि शराबबंदी करती है तो राज्य की आय के स्त्रोत पर काफी असर पड़ेगा।
साल में नौ करोड़ बोलतें पी जाते हैं लोग
वहीं, बात करें सालाना शराब के सेवन की तो यहां के लोग हर साल 9 करोड़ शराब की बोतलों का सेवन करते हैं। इसके तहत राज्य में हर साल 1829 करोड़ रुपए की शराब बिकती है। यदि हम महीने की बात करें तो प्रदेश के शराब उपभोक्ता मात्र एक माह के भीतर ही करीब 75 लाख शराब की बोतलें पी जाते हैं।
रोजाना ढाई लाख के करीब का सेवन
प्रतिदिन के हिसाब से यहां करीब ढाई लाख के करीब बोलतों की खपत होती है, जबकि शराब पीने का आदी व्यक्ति एक माह में अकेले ही पांच बोलतें शराब पी जाता है। अगर बोतल के मूल्य की बात करें तो एक बोतल का औसत मूल्य 166 रुपए के आस-पास होता है। इस हिसाब से एक व्यक्ति महीने में 830 रुपए तो साल में 9960 रुपए की शराब का सेवन करता है।
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बता दें कि प्रदेश में एक वक्त ऐसा भी था जब शराब की बिक्री के चलते उत्पन्न होने वाला रेवेन्यू को देखकर पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह के कार्यकाल के दौरान सरकार ने शराब का कारोबार अपने हाथ में ले लिया था। इस दौरान हिमाचल प्रदेश बेवरेजेज लिमिटेड नाम की कंपनी का भी गठन किया गया था। इस कारोबार की देखरेख का जिम्मा सरकार की ओर से एक सीनियर आईएएस अधिकारी को सौंपा गया था। सरकार द्वारा यह भी निर्णय लिया गया था कि वे खुद अपने स्तर पर कारखानों से शराब खरीदेंगे और बेचेंगे।
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मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश में हिमाचल प्रदेश अक्साइज एक्ट के तहत शराब की बिक्री के लिए 14 प्रकार के लाइसेंस दिए जाते हैं। इनके अतंर्गत ही राज्य में शराब की खरीद फरोक्त संभव है। वर्तमान में प्रदेश में करीब 2500 वाइन शॉप हैं, जिनके जरिए शराब की बिक्री हो रही है। इनमें देसी शराब की करीब 1700 दुकानें हैं और 370 अंग्रेजी शराब की। हर दुकान की रोजाना की बिक्री 130-150 बोतलों के करीब है।
नई नीति से होगा मुनाफा, बिकेगी सस्ती शराब
हिमाचल में नई आबकारी नीति एक जुलाई 2021 से लागू कर दी गई है। इसके तहत प्रदेश में 31 मार्च 2022 तक नई नीति के तहत शराब की बिक्री और सप्लाई का काम होगा। इस संबंध में जानकारी देते हुए राज्य कर एवं आबकारी आयुक्त यूनुस ने बताया कि नई नीति के अंतर्गत प्रदेश सरकार को पिछले साल की तुलना में 228 करोड़ रुपए से बढ़कर करीब 1829 करोड़ का राजस्व अर्जित होगा।
जानें नई नीति के प्रवाधान-
- नई नीति के चलते शराब पर लाइसेंस फीस व एक्साइड ड्यूटी कम कर दी गई है।
- इसके अंतर्गत देशी व भारत में निर्मित शराब के कम कीमत वाले ब्रांड सस्ते किए गए हैं।
- यहां तक कि इस नीति में शराब उत्पादक कंपनियों को ईएनए की कंपलसरी टेस्टिंग के प्रावधानों में छूट की व्यवस्था भी की गई है।
- नई नीति से अर्जित होगा अधिक राजस्व- नई नीति के तहत एमआरपी से ज्यादा दाम पर शराब बेचने वाले विक्रेता पर कम जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है।
- विदेशी और महंगी शराब की उपलब्धता बनाए रखने के लिए थोक विक्रेताओं को अब किसी स्टेट कस्टम बांडेड वेयरहाउस से शराब लेने की छूट दी गई है।



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