मंडी। यूक्रेन और रूस के बीच छिड़ी भीषण जंग के 11वें दिन मंडी जिले स्थित जोगेंद्रनगर क्षेत्र के अंतर्गत आते लडभड़ोल क्षेत्र के निवासी एमबीबीएस के छात्र विवेक सुरक्षित घर पहुंचे। घर आने के बाद विवेक ने कहा कि उन्हें यूक्रेन में भारतीय होने की भी सजा मिली।
मौत के मुंह से निकलकर पहुंचे विवेक ने कहा कि वह युद्ध के पहले दिन से निकलने की कोशिश कर रहे थे। कुछ दिन बंकर में ही रहे। मौका मिलने पर किराये की गाड़ी से वह कीव रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। यहां ट्रेन में चढ़े ही थे कि उन्हें धक्का मारकर बाहर निकाल दिया गया। कहा गया कि जब यूक्रेन में रूसी हमले पर भारत का सहयोग नहीं मिला तो वे भारतीयों का साथ नहीं देंगे।
9 दिन चिप्स कुरकुरे खाकर काटे दिन
यूक्रेन में भारतीय होने की मिलि सजा ट्रेन से धक्का मारकर बाहर निकाला, लगेज फैका : विवेक pic.twitter.com/P0xRui9fga
— rajesh sharma (@rajesh310sharma) March 6, 2022
उन्होंने बताया कि उसके साथ हुई धक्का-मुक्की में उसकी जैकेट भी फट गई और लगेज भी चलती रेलगाड़ी से बाहर फेंक दिया गया। 11 दिन में सिर्फ दो ही दिन उन्हें भरपूर खाना मिल पाया। नौ दिन चिप्स, कुरकुरे और जूस के सहारे जिंदा रहकर वह अपने घर पहुंचे हैं। विवेक ने कीव के होस्टल प्रबंधन की सराहना की व विकट परिस्थितियों में यूक्रेनवासियों के सौतेले व्यवहार पर नाराजगी जताई।
विवेक ने बताया कि रिश्वत के तौर पर पैसे देकर अगले दिन ट्रेन में सवार हुए और सुरक्षित जगह तक पहुंचने के लिए 250 किलोमीटर का सफर तय किया। उसके बाद भारत सरकार की मदद मिलने से वे दिल्ली तक पहुंचे और दिल्ली से शनिवार को अपने घर के लिए रवाना हुए।
हॉस्टल के नजदीक हुए कुल 8 धमाके
रविवार सुबह करीब साढ़े सात बजे अपने घर छोटे बाग पहुंचे विवेक ने बताया कि वहां के हालात से उन्होंने जो दिक्कतें झेली हैं उन्हें आजीवन भुलाया नहीं जा सकता। हर ओर बमबारी और राकेट के हमले से जब यूक्रेन थर्रा गया था तो वह अपने अन्य सहपाठियों के साथ बंकर में खौफ के साए में रह रहे थे। पहले दिन एक साथ अलग-अलग जगहों पर हास्टल के नजदीक आठ बम धमाके हुए तो उन्होंने हास्टल छोड़कर बंकर में शरण ली।
नायब तहसीलदार पूर्ण चंद कौंडल ने बताया कि विवेक के सुरक्षित घर लौटने से क्षेत्र में खुशी की लहर है। पंचायत प्रधान राजीव खान और विवेक के दादा होशियार सिंह, दादी मनसा देवी ने केंद्र सरकार का आभार जताते हुए गुहार लगाई है कि यूक्रेन में जितने भी भारतीय विद्यार्थी फंसे हैं, उन्हें भी सुरक्षित घर तक पहुंचाया जाए।



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