शिमलाः आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। हर कोई महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक तथा राजनीतिक तौर पर सशक्त बनाने की बात करने में लगा हुआ है। परंतु देश में आज महिलाओं की स्थिति क्या है ये किसी से भी छिपा नहीं है। रोजाना महिलाएं शारिरिक व मानसिक प्रताड़ना का शिकार होती हैं। इसके अलावा महिलाओं व बच्चियों के साथ घटित हो रही आपराधिक वारदातें भी थमती हुई नजर नहीं आ रही हैं।
हर 24 घंटों में एक दुष्कर्म
वहीं, बात करें देवभूमि हिमाचल प्रदेश की तो हिमाचल प्रदेश पुलिस की वेबसाईट पर मौजूद के आंकड़ों के तहत यहां हर 24 घटों में एक महिला दुराचार की शिकार होती है। इसके अलावा हर 5 घंटे के भीतर महिलाओं सहित युवतियां तथा बच्चियां जुर्म का शिकार होती हैं। जबकि 26 महिलाओं की हत्या हुई है और एक की गैर इरादतन हत्या का मामला भी दर्ज हुआ है।
बीते साल के हाल
बात करें साल 2021 कि तो इसमें करीब 68 महिलाओं ने सुसाइड कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर दी। इसमें 45 गृहणियां, 3 मजदूर, 3 छात्राएं, 2 सरकारी कर्मचारी, 7 निजी क्षेत्र में काम करने वाली महिलाएं शामिल हैं। जबकि मरने वाली अन्य 8 महिलाओं से संबंधित कोई जानकारी नहीं है। बतौर रिपोर्टस, इनमें से 32 महिलाओं ने पारिवारिक झगड़ों तथा 18 महिलाओं ने शादी संबंधित परेशानी व 2 ने आर्थि कारणों से सुसाइड किया है।
जानें क्या बोलीं लोक सेवा आयोग की सदस्य
इस संबंध में जानकारी देते हुए हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की सदस्य डॉ.रचना गुप्ता ने बताया कि एक अध्ययन से पता चला है कि कोरोना के समय अधिकतर महिलाएं घरेलू हिंसा का शिकार हुई हैं। जिस वजह से घरेलू हिंसा के मामलों में 10 से 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने बताया कि आत्महत्या के मामलों में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई है।
18 से 35 वर्ष के बीच है उम्र
इन में से ज्यादातर 18 से 35 वर्ष की उम्र की महिलाएं व युवतियां शामिल है। उन्होंने कहा कि ये चिंता का विषय है। इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि कोई ये तर्क भी दे सकता है कि पहले भी रेप होते रहे हैं, अन्य अपराध होते हैं, अब रिपोर्ट ज्यादा हो रहे हैं लेकिन हो तो रहे हैं। ये तो वो मामले हैं जो सामने आए, जो सामने नहीं आ पाए या रिपोर्ट नही हुए उसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।



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