शिमला: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला का माहौल ओल्ड पेंशन स्कीम को लेकर गर्म है। वहीं, शिमला ग्रामीण से विधायक विक्रमादित्य सिंह ने आज लाइव आकर कांग्रेस पार्टी को सवालों के घेरे में ले लिया।
मुख्यमंत्री का सपना देख रहे मुकेश:
बता दें कि कांग्रेस पार्टी ओल्ड पेंशन स्कीम का राजनीतिक लाभ लेने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। कर्मचारियों के पेंशन मुद्दे को भुनाकर नेता प्रतिपक्ष मुख्यमंत्री बनने का सपना संजोए बैठे हैं।
उन्होंने आज सदन में कहा कि सरकार यदि कर्मचारियों के हित में पुराना पेंशन बहाल नहीं करती है तो आठ महीने बाद उनकी सरकार बनते ही पुरानी पेंशन बहाल की जायेगी।
प्रदेश के वित्तीय हालात के बारे में सोचें कर्मचारी:
जिसके बाद आज सही का समर्थन और गलत का विरोध की राजनीति करने वाले विधायक विक्रमादित्य सिंह ने फेसबुक पर लाइव आकर कहा कि कर्मचारियों का हित सर्वप्रथम है लेकिन यह हमारा प्रदेश है और हमारे ऊपर 65 हजार करोड़ का वित्तीय कर्ज है। इसका भी ध्यान रखना होगा।
विक्रमादित्य ने कहा कि यह कर्ज लगातार हर महीने बढ़ते जा रहा है। ओपीएस लागू होने से वित्तीय बोझ और अधिक बढ़ जाएगा। इसका भी ध्यान कर्मचारी बंधुओं को रखना होगा। यह हम सबका प्रदेश है।
ओपीएस पर राजनीति गलत: विक्रमादित्य
वहीं, विक्रमादित्य ने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीति करने से बचना चाहिए। यह विषय राजनीति का नहीं है। अब ऐसे में सवाल उठता है कि ओपीस पर राजनीति कौन कर रहा है? कांग्रेस पार्टी और खासकर नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री इस मुद्दे पर सबसे अधिक राजनीतिक रोटी सेंक रहे हैं।
फेसबुक लाइव के दौरान विक्रमादित्य ने नाम तो किसी का नहीं लिया लेकिन उनका भी निशाना साफ था कि मुकेश अग्निहोत्री इस मुद्दे पर राजनीति ना करें। लुभाने के लिए हम कुछ भी कह सकते हैं, बातें बड़ी बड़ी कर सकते हैं। लेकिन हमें अपनी परिस्थितियों को देखना भी आवश्यक है।
हालांकि, इसके बाद विक्रमादित्य ने कहा कि जब प्रदेश में हमारी सरकार बनेगी तो हम ओल्ड पेंशन स्कीम के ऊपर निश्चित तौर से विचार करेंगे और इसके लिए वित्तीय प्रबंध कैसे हो इस हेतु योजना बनाएंगे।
वीरभद्र सिंह ने नया पेंशन स्कीम किया था लागू:
गौरतलब है कि अटल बिहारी वाजपेई की तत्कालीन सरकार ने जब पुराने पेंशन स्कीम को बंद कर न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) लागू किया था तब हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री थे और उन्होंने इस नए स्कीम को स्वागत योग्य बताते हुए इसे हिमाचल प्रदेश में भी लागू किया था।
देश का इकलौता राज्य पश्चिम बंगाल था जिसने नए पेंशन स्कीम का विरोध करते हुए अपने राज्य में लागू नहीं किया था। ऐसे में साफ है कि जब वीरभद्र सिंह ही ओपीएस के खिलाफ थे।
तो अब कांग्रेस पार्टी सिर्फ कर्मचारियों को लुभाकर राजनीतिक लाभ लेने ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने का वादा कर रही है। जिसका विरोध विक्रमादित्य ने किया है।



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